Chairman's Message

Shri Suresh Singh
Chairman
Chairman's Message
" राह बनी एक मंज़िल "
इस विद्या मंदिर के 26 वें सत्र में प्रवेश करने पर मैं हर उस व्यक्ति के प्रति कृतज्ञ हूँ जिसने विद्यालय को इस मंजिल तक पहुँचाने में अपना योगदान दिया है। मुझे यह सूचित करते हुए हर्ष होता है कि इन 25 वर्षो में इस विद्यालय ने इन्जीनियरिंग कॉलेज तथा डिग्री कॉलेज की स्थापना तक की यात्रा तय की है।
हम सभी जानते हैं कि शिक्षा विकास का मूल मंत्र है परन्तु अब इसका व्यवसायीकरण हो गया है। मैं शिक्षा को व्यवसाय नहीं अपितु समाज तथा राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझता हूँ। यह विद्यालय हर उस छात्र को अवसर प्रदान करता है जो साधनहीन है। यहाँ कम शुल्क में योग्य एवम् अनुभवी शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों को आधुनिकतम शिक्षा प्रदान की जाती है। नारी उत्थान के लिए विद्यालय में बालिकाओं को निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था है। हमारा मुख्य उद्देश्य है कि हम विद्यालय से ऐसे चरित्रवान, संस्कारी, कर्मठ, त्यागी तथा मानवतावादी विद्यार्थी पैदा करें जो अपने परिवार, गाँव, शहर, समाज तथा राष्ट्र के विकास में योगदान प्रदान कर सकें।
परन्तु यह मंजिल नहीं है। बचपन में रास्ते को मंजिल बनाने का सपना अभी पूरा नहीं हुआ है। जो कुछ भी हासिल किया है, वह अन्तिम नहीं है। जीवन में अभी भी बहुत कुछ बाकी है। मेरा सपना है कि यह विद्या मंदिर एक आदर्श शिक्षण संस्थान के रूप में भारत के नक्शे में अपनी अलग पहचान बनाए जिसके लिए आप सभी के सहयोग, मार्गदर्शन तथा आशीर्वाद की आवश्यकता हैं।
"अभी असली मंजिल बाकी है, अभी इरादों का इम्तिहान बाकी हैं।
अभी नापी हैं जमीन मुट्ठी भर अभी नापना आसमाँ बाकी है।"

